ताजमहल के कमरे खोलने की याचिका पर HC की फटकार, कहा- PIL का दुरुपयोग न करें, फिर आना

Tajmahal

The Fact India: दुनिया के सातवे अजूबे में शुमार ताज महल (Taj Mahal Case) के 22 कमरों को खोले जाने की मांग को लेकर पिछले कुछ वक़्त से जमकर बवाल मचा हुआ है. इसी बीच आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया. इस दौरान कोर्ट ने बेहद की तल्ख टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई.

जस्टिस डीके उपाध्याय ने कहा कि याचिकाकर्ता PIL व्यवस्था का दुरुपयोग न करें. पहले यूनिवर्सिटी जाएं, PhD करें, तब कोर्ट आएं. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई रिसर्च करने से रोके, तब हमारे पास आना. उन्होंने कहा कि कल को आप आएंगे और कहेंगे कि आपको जजों के चैंबर में जाना है, तो क्या हम आपको चैंबर दिखाएंगे? इतिहास आपके मुताबिक नहीं पढ़ाया जाएगा.

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ताजमहल (Taj Mahal Case) के 20 कमरों को खोलने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप एक समिति के माध्यम से तथ्यों की खोज की मांग कर रहे हैं, आप कौन होते हैं, यह आपका अधिकार नहीं है और न ही यह RTI अधिनियम के दायरे में है, हम आपकी दलील से सहमत नहीं हैं.

अदालत ने कहा कि हमने पाया कि याचिका में नियम 226 के तहत ताजमहल के इतिहास के संबंध में अध्य्यन की मांग की गई है. इसके अलावा ताजमहल के अंदर बंद दरवाजों को खोलने की मांग की गई है.” हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस डीके उपाध्याय और सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने कहा “हमारी राय है कि याचिकाकर्ता ने पूरी तरह से गैर-न्यायसंगत मुद्दे पर फैसला देने की मांग की है. इस अदालत द्वारा इन याचिकाओं पर फैसला नहीं किया जा सकता है.

अदालत ने कहा- जहां तक ताजमहल के कमरे खोलने की मांग है, हमारा मानना है कि इसमें याचिकाकर्ता को रिसर्च करना चाहिए. हम इस रिट पिटिशन को स्वीकार नहीं कर सकते हैं.