Army Day 2021: जानिए 15 जनवरी को क्यों मनाया जाता है आर्मी डे, क्या है इस दिन का इतिहास

Army Day 2021

The Fact India: 15 जनवरी को आर्मी डे (Army Day 2021) मनाने के पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला ये कि 15 जनवरी 1949 के दिन से ही भारतीय सेना पूरी तरह ब्रिटिश थल सेना से मुक्त हुई थी। आजादी के बाद देश में कई प्रशासनिक समस्याएं पैदा होने लगी थीं और फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा था। भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के एम करियप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे। उस समय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे। केएम करियप्पा के सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद से ही हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाने लगा।
इस खास मौके पर पूरा देश सेना के वीर जवानों के अदम्य साहस, शहीद जवानों की शहादत को याद करता है। देशभर में सेना की अलग-अलग रेजिमेंट में परेड के साथ ही झांकियां भी निकाली जाती हैं।

कैसे मनाया जाता है आर्मी डे
इस दिन (Army Day 2021) दिल्ली की इंडिया गेट पर बनी अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। साथ ही शहीदों की विधवाओं को या परिवारवालों को सेना मेडल और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। भारतीय आर्मी का गठन 1776 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोलकाता में किया था। आज भारतीय आर्मी के 53 कैंटोनमेंट और 9 आर्मी बेस हैं।

भारतीय सेना के शौर्य के किस्से
भारतीय थल सेना में वर्तमान में साढ़े 15 लाख से अधिक है। भारत के दुनिया की सबसे बड़ी थलसेना है। दूसरे नंबर पर किम जोंग की सेना है जबकि तीसरे नंबर पर चीन की सेना है। साल 1965 में भारतीय सेना के पाकिस्तान को हराकर अपनी अदम्य ताकत और हिम्मत का परिचय दिया था। इस युद्ध में भारतीय सेना के सभी जवानों से शौर्य का प्रदर्शन किया था लेकिन शहीद अब्दुल हमीद और मोहम्मद नौशाद के पराक्रम की खूब चर्चा होती है। इसके बाद 1971 में भारत पाक के बीच लड़ा गये युद्ध में भारतीय सेना ने अपना पराक्रम दिखाया था। 1962 के भारत चीन युद्ध में भी दुनिया ने भारतीय सेना का पराक्रम और साहस देखा।

1999 करगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना को चटायी धूल
इसके बाद साल 1999 में भारत पाकिस्तान के बीच करिगल युद्ध हुआ। इस युद्ध में हिंदुस्तान की सेना ने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाते हुए घुसपैठियों को करगिल की पहाड़ियों से खदेड़ा था। भारतीय सेना के इतिहास में इस युद्ध को स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा। इस बीच भारतीय सेना ने कई मौकों पर अपनी बहादुरी का परिचय दिया। सीमा के अंदर और सीमा पर दोनों जगहों ने भारतीय सेना ने भारत मां का सिर गर्व से ऊंचा किया है।