बेनीवाल ने फिर उगला वसुंधरा के लिए ज़हर

द फैक्ट इंडिया ब्यूरो । नेता हो या उप नेता (hanuman beniwal) हर कोई एक दूसरे को कुछ ना कुछ बोलते नज़र आ ही जाते हैं। या फिर किसी पर ताने कसते नज़र आ जाएंगे तो कभी किसी पर बयानबाजी करते दिखाई देंगे और राजनीती में कोई ज्यादा देर तक खामोश नहीं रह सकता । कुछ ऐसा ही सुनने में आया है नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल की तरफ से जहा उन्होंने । उप चुनाव में गठबंधन बरकरार रहने के बाद लगता था कि आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल (hanuman beniwal) कम से कम पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर अपना मुंह नहीं खोलेंगे और अब आग उगली जाएगी तो केवल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ। लेकिन लगता है बेनीवाल खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर पाए और उनकी जुबान आखिर फिसल ही गई और वो भी उपचुनावके दर्मिया ही। लेकिन ये पहली बार नहीं जब सांसद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा के बारे में कुछ कहा हो इससे पहले भी उन्होंने वसुंधरा को नागिन और खुद को सपेरा बताया था।

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आपको बता दें की उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे पूरी कोशिश में लगे हैं कि वसुंधरा राजे को साइड लाइन कर दें। साथ ही कहा कि यह करके ही छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव और उप चुनाव में हुए गठबंधन में पूरे प्रदेश की जनता ने देख लिया कि वसुंधरा राजे कहां थीं? अभी भी कहां हैं? और तो और अशोक गहलोत को भी नहीं छोड़ा और गहलोत के ओएसडी पर भी निशाना साधते हुए बोले कि ओएसडी देवाराम सुपर सीएम हैं। कुलदीप रांका केवल नाम के हैं। राठौर के साथ उनकी दूरियों पर उन्होंने कहा कि जब दारिया के परिवार ने राठौड़ से समझौता कर लिया तो उन्हें राठौड़ से क्यों लड़ना है। वहीं राठौड़ पहले वसुंधरा राजे के पैरोकार थे, इसलिए भी उनकी कम बनती थी। उन्होंने अशोक गहलोत को खुली चुनौती देते हुए कहा की यदि वे विधानसभा चुनावों में तीसरा मोर्चा खड़ा नहीं करते तो वसुंधरा राजे के खिलाफ प्रदेश की जनता वोट कांग्रेस को दे जाती।

बेनीवाल ने अशोक गहलोत को चुआती दे डाली और बोले की यदि वे स्वीकार करें तो या तो दोनों सीटों पर कांग्रेस हारे तो वे इस्तीफा दे दें या फिर हनुमान बेनीवाल का भाई खींवसर में हार जाए तो हनुमान बेनीवाल सांसद से इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री को खुली चुनौती है। उन्होंने कहा कि खींवसर में अशोक गहलोत ने 14 मंत्री और 60 विधायकों को प्रचार में लगाया हुआ है। गहलोत के खींवसर से 200 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों को हटाने पर बेनीवाल ने कहा आचार संहिता के बावजूद नागौर कलेक्टर ने दो दिन में 40 कर्मचारियों को हटा दिया। बिना किसी आरोप के ऐसा किआ गया और नहीं उन्हें कोई नोटस दिए गया और अब मंडावा में भी ऐसे ही हालत हो रहे है। उनका आरोप है की कार्यकर्ताओ को बिना किसी अपराध के नोटिस दिए जा रहे हैं और उनको पाबंद किआ जा रहा है।

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