पहली बार हिंदी साहित्य के लिए मिला बुकर प्राइज, गीतांजलि श्री को मिला सम्मान

The Fact India: हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री ने अपने उपन्यास रेत समाधी के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता हैं. रेत समाधी का अंग्रेजी अनुवाद मशहूर अमेरिका अनुवादक डेज़ी रॉकवेल ने किया हैं. उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से ताल्लुक रखने वाली गीतांजलि श्री पिछले तीन दशक से लेखन की दुनिया में सक्रिय हैं. श्री की तीन उपन्यास समेत कई कथा संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ‘ रेत समाधी ‘ हिंदी की पहली ऐसी करती हैं , जो न केवल अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की लोंगलिस्ट और शॉर्टलिस्ट तक पहुंची बल्कि बुकर भी जीती.

लेखिका गीतांजलि श्री गीतांजलि श्री की उपन्यास ‘ रेट समाधी ‘ 50 , 000 पौंड यानि करीब 50 लाख रूपए के साहित्यिक पुरस्कार के लिए विश्व की पांच किताबों से इसकी प्रतिस्प्रधा हुई. पुरस्कार की राशि लेखिका और अनुवादक के बिच विभाजित की जाएगी। जुड़ी सदस्यों ने इस उपन्यास के बारे मैं कहा की यह पुस्तक ” हमे 80 वर्षीय महिला के जीवन के हर पहलु और आश्चर्यचकित कर देने वाली अतीत में ले जाती हैं। उपन्यास का डेज़ी रॉकवेल का अनुवाद शब्दों के खेल से भरा हुआ हैं.

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यह एक शानदार और अप्रतिरोध्य उपन्यास हैं। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से तालुक रखने वाली गीतांजलि श्री पिछले तीन दशक से लेखन की दुनिया में हैं. श्री की तीन उपन्यास ‘ माई ‘ और ‘ खली जगह ‘ प्रकाशित हुआ. उनकी कृत्यों का अंग्रेजी , फ्रेंच , जर्मन, सर्बिया और कोरियन भाषाओ में अनुवाद हुआ था. दिल्ली की 64 वर्षीय लेखिका गीतांजलि की अनुवादक डेज़ी रॉकवेल एक पेंटर एवं लेखिका हैं, जो अमेरिका में रहती हैं.

उन्होंने हिंदी और उर्दू की कई साहित्य कृतियों का अनुवाद किया हैं। गौरतलब बात है की डेज़ी ने अपनी पि एच डी उपेंद्र नाथ अश्क से लेकर खदीजा मस्तूर , भीष्म साहनी , उषा प्रियंवदा और कृष्णा सोबती के उपन्यासों पर का अनुवाद किया हैं। बुकर पुरस्कार अंग्रेजी में अनुदित और ब्रिटैन या आयरलैंड में प्रकाशित किसी एक पुस्तक को हर साल दिया जाता हैं। 2022 के पुरस्कार के विजेता का ऐलान 26 मई को लन्दन में एक समारोह में किया गया।

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