चक्का जाम! राजस्थान में आज नहीं चलेंगी निजी बसें, इन मांगों पर अड़े संचालक

The Fact India: कोरोनाकाल में लोगों को उनके व्यवसायों में बेहद नुकसान हुआ है. इसी में निजी बस संचालक भी शामिल है. ऐसे में आज (22 july) निजी बस संचालकों ने अपनी मांगों के चलते चक्का जाम (Bus Strike) किया है. इसके चलते प्रदेश में करीब 11000 बसें बंद रहेंगी. निजी बस संचालकों की मांग है की निजी बसों का कोरोनाकाल का एक वर्ष का टैक्स माफ किया जाए, किराए में बढ़ोतरी की जाए, बसों को सीएनजी में परिवर्तित करने के लिए सरकार दो साल के लिए बिना ब्याज के 3 लाख का लोन दे. संचालकों का कहना है कि आज एक दिन की हड़ताल के बाद भी अगर सरकार ने मांगों को स्वीकार नहीं किया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे.

पहले ही दे दी थी चेतावनी

निजी बस संचालकों के अनुसार करीब एक महीने पहले ही परिवहन मंत्री को ज्ञापन सौंप दिया गया था और चेतावनी भी दे दी गई थी कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो आंदोलन (Bus Strike) किया जाएगा. साथ ही आज यानि 22 जुलाई की एक दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को बढ़ाया जाएगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी. हालांकि 2 महीने का टैक्स पहले ही माफ किया जा चुका है.

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कोरोना ने की हालत खराब

निजी बसों की हड़ताल में ट्रेवल एजेंसिया भी शामिल है. हड़ताल में शामिल निजी बस संचालतों और ट्रेवल एजेंसियों का कहना है कि मांगे गलत नहीं है क्योंकि लगभग 1 वर्ष से स्कूल कॉलेज, अदालत, सरकारी ऑफिस, कोचिंग संस्थाएं बंद हैं. साथ ही सोशल डिस्टेंस के कारण बसों में यात्रियों का अभाव होने से 80% बसें बंद पड़ी हैं. सरकार खड़ी हुई बसों का टैक्स मांग रही है जो उचित नहीं है. जब डीजल का रेट 42 रुपये प्रति लीटर था तब सरकार की ओर से 85 पैसे प्रति किलोमीटर किराया तय किया गया था. अब डीजल का रेट 100 रुपये प्रति लीटर हो गया है तब राज्य में किराया भी बढ़ाया जाना चाहिए. टोल टैक्स, बीमा और स्पेयर पार्ट्स की दरें भी बढ़ गई हैं. इसे देखते हुए अन्य राज्यों ने भी 40 प्रतिशत तक किराया बढ़ाया है.