कपड़ा नगरी की दबंग गर्ल का ‘दंगल’

The Fact India : ‘म्हारी छोरिया छोरो से कम हैं के’ ये डायलॉग तो आपने खूब सुना होगा।और ऐसी बहुत सारी बेटियों को भी भी देखा होगा, जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर देश का नाम विदेशों में भी रोशन कर दिखाया हैं. आज हम आपको एक गरीब परिवार की ऐसी ही बेटी (Dangal Girl) के बारे में बताएंगे, जिसने तमाम विपरीत हालातों के बावजूद वो कर दिखाया, जो श्याद हर किसी से लिए संभव नहीं हैं. दरअसल, इस लड़की के पिता ने अपनी को दंगल गर्ल बनने का संकल्प लिया. बेटी ने भी पिता के सपने को साकार करने में पथरीली डगर पर अपने कदम नहीं डगमगाने दिए और अब इस बेटी ने फ्रांस का टिकट कटाया है.

ये कहानी हैं राजस्थान की कपड़ा नगरी यानी भीलवाड़ा के एक किसान परिवार की जो की माली खेड़ा में रहता हैं. यहां रहने वाले छोटू माली ने देश के लिए कुश्ती खेलने का सपना देखा था. लेकिन उनकी कुश्ती का यह शौक और सपना परिवार के पेट पालने की जिम्मेदारी में अधूरा रह गया. अब उनके इस सपने को उनकी बेटी ने पूरा करने का निश्चय लिया है और आज वो बेटी पहलवान दबंग गर्ल (Dangal Girl) के नाम से भीलवाड़ा में जानी जाती है और परिवार का नाम रोशन कर रही है. इस दबंग गर्ल का नाम माया हैं. दबंग गर्ल ने हाल ही में राजधानी दिल्ली में हुई कुश्ती प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और अब वो फ्रांस में अपना दम दिखाएगी। उनकी मां ये खुद स्वीकार करती है कि आज उनकी बेटी के कारण उनकी पहचान बनी. वहीं पिता को उम्मीद है कि बेटी इंटरनेशनल लेवल पर भारत का झंडा लहराएगी और मेडल जीतेगी.

भारत की बेटी ने ब्राजील में लहराया तिरंगा, डेफ ओलंपिक में जीता गोल्ड मेडल

भीलवाड़ा दंगल गर्ल यानी माया माली के इस सफर की बात करें, तो वो बताती हैं की शुरुआती दौर में उन्हें बहुत परेशानी आई. मगर लगातार 7 साल से की जा रही (Dangal Girl) मेहनत अब रंग लाने लगी है. माया का कहना है कि उसके परिवार को उस पर बहुत विश्वास है और वह अपने परिवार के इस विश्वास पर खरा उतरेगी.

दंगल गर्ल माया का लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए मेडल जितना है. साथ ही माया माली के कोच जगदीश जाट का कहना है कि आज पहलवानी शोक रखने वाली खिलाड़ियों (Dangal Girl) के लिए माया एक आइडियल बन चुकी है और वाकई देखा जाए तो माया पुरे देश की उन तमाम बेटियों के लिए एक इंस्पिरेशन बन चुकी हैं , जो खुद को किसी भी वजह से कमतर आंकती हैं.