Engineer’s Day: जानिए कोयला खदान में काम करने वाली देश की पहली महिला इंजीनियर की कहानी

The Fact India: आज महिलाएं हर जगह पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है. सभी तरह के क्षेत्रों में आपकों महिलाएं काम करती दिख जाएंगी और अगर फिर भी कुछ क्षेत्र बचते है तो वहां धीरे धीरे महिलाएं अपनी जगह बना रही है. आज अभियंता दिवस (Engineer’s Day) के मौके पर हम एक ऐसी ही महिला अभियंता की कहानी आपको बताने जा रहे है जिन्होंने इतिहास रचा. देशों विदेशों में जहां उनकी तारीफ की जा रही हैं. झारखंड की आकांक्षा कुमारी अंडरग्राउंड कोल माइन्स में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर है. आकांक्षा की कोलमाइंस की पहली महिला इंजीनियर बनने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.

बालू के घरौंदों से मिली प्रेरणा

आकांक्षा झारखंड के बरकागांव की रहने वाली है. गांव के आसपास कई कोयले की खदाने है. जब भी आकांक्षा ट्रकों को यहां से कोयला निकाल के ले जाते देखती तो मन में एक ही सवाल आता कि जब बालू का घरौंदा बनाने के बाद पैर बाहर निकालते है तो घरौंदा टूट जाता है. फिर कोयले की खदान में से कोयला निकालने के बाद जमीन क्यूं नहीं धंसती. अपने इसी सवाल का पीछा करते करते आंकाक्षा अपने इतिहास रचने के सफर पर निकल पड़ी.

बिरसा इंस्टिट्यूट में सभी लोग चौंक गए

आकांक्षा का आगे का सफर बिरसा इंस्टिट्यूट से शुरु (Engineer’s Day) हुआ. पर यहां एडमिशन लेने का किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है. पहली बार जब फॉर्म लेकर बिरसा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सिंदरी पहुंची तो वहा काउंसलिंग में बैठे लोग फॉर्म में माइनिंग इंजीनियरिंग देख चौंक गए. आकांक्षा से अपने फैसले पर एक बार फिर सोचने को कहा पर आकांक्षा का मन तो उन खदानों में बस चुका था. इंस्टिट्यूट में एडमिशन भी हो गया. फिर बस फैमिली और शिक्षकों के साथ से आकांक्षा आगे बढ़ती गई.

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2018 में पढ़ाई पूरी की और आज अपने सपने को जी रही है

आकांक्षा की माइनिंग की पढ़ाई 2018 में पूरी हुई. जिसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की राजस्थान स्थित बलारिया माइन्स में काम किया, लेकिन मन तो अंडरग्राउंड कोल माइन्स की सुरंगों में अटका था. वहां माइन्स से मैटल निकालने के लिए विस्फोट किया जाता था, जबकि कोल माइन्स में सुरंग बनाकर ​कोयला निकाला जाता है. 24 अगस्त, 2021 को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की अंडरग्राउंड कोल माइन्स में काम करने का मौका भी मिल गया और आज वे भारत की पहली अंडरग्राउंड कोल माइन में काम करने वाली महिला बनी चुकी है.