Rajasthan : मोदी-वसुंधरा की मुलाकात से राजस्थान में बदलेंगे समीकरण!

The Fact India : राजस्थान (Rajasthan) की सियासत वाकई अब गरमाने लगी है. दरअसल अभी तक कांग्रेस और उसमें बंटे खेमों को लेकर आए दिन नई नई बातें सामने आती रही हैं. लेकिन अब भाजपा के अंदरूनी हिस्सों में भी सियासत की नई तहरीर लिखी जाने लगी है. दरअसल कल जब सूबे की पूर्व मुखिया वसुंधरा राजे ने दिल्ली में पीएम मोदी और कुछ दूसरे नेताओं से मुलाकात की तो उसके बाद से ही राजस्थान भाजपा की राजनीति में कई सियासी कयास लगने शुरू हो गए हैं. अब कहानी ये कि अगले साल राजस्थान (Rajasthan) में विधानसभा चुनाव होने हैं. सत्ताधारी कांग्रेस कई मुद्दों को लेकर इस वक्त पब्लिक और विपक्षी पार्टियों के बीच घिरी है और खासकर हाल ही में हुए रीट पेपर लीक मसले पर तो सरकार की जबरदस्त किरकिरी भी हुई है. इस मामले में राजस्थान भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग की लेकिन कांग्रेस ने उसे दरकिनार कर दिया. दरअसल कहने का मतलब ये कि पिछले कुछ समय में राजस्थान में भाजपा को लेकर अकसर ये कहा जाने लगा कि वो विपक्ष की अपनी भूमिका भी सही ढंग से नहीं निभा पा रही वहीं दूसरी ओर जिस तरह कांग्रेस में गुटबाजी की तस्वीर अकसर देखने को मिलती रही है. वहीं भाजपा भी इससे अछूती नहीं है. अब चाहे भाजपा नेता कितना ही मना कर ले कि उनकी पार्टी में ऐसा कुछ नहीं लेकिन कहते हैं कि सच्चाई कभी छुप नहीं सकती भाजपा में भी सतीश पूनिया और वसुंधरा राजे गुट कई बार कई मौकों पर नजर आ ही जाते हैं.

Rajasthan : अपनी योजना की असलियत भी जान लो सरकार…

हाल ही में वसुंधरा राजे ने अपने जन्मदिन के मौके पर जिस तरह शक्ति प्रदर्शन किया उसकी चर्चाएं भी पार्टी में काफी हुई. कई विधायक और दूसरे कई बड़े नेता उनके जलसे में शामिल हुए. तो भाजपा के दूसरे गुट में बैठे नेताओं की आंखे भी चौड़ी हो गई. जाहिर है जब चुनाव करीब हों और फिर इस तरह की तस्वीरें सामने आए…तो विरोधियों में चिंता होना जाहिर है और जब मसला सियासी हो तो फिर परेशानियां ज्यादा ही हो जाती है. अब दूसरी तरफ वसुंधरा राजे का दिल्ली दौरा और वहां पीएम मोदी से सीधी मुलाकात दूसरे नेताओं से भी चर्चा, तो राजस्थान में विराजे दूसरे भाजपा नेताओं में खलबली मचना तय है और ऐसा ही इस वक्त हो रहा है. चर्चाएं ये भी है कि राजस्थान में शायद वसुंधरा राजे को कोई नई बड़ी जिम्मेदारी मिल जाए. अब सोचने वाली बात ये कि इस वक्त राजस्थान भाजपा में कोई बड़ी जिम्मेदारी क्या हो सकती है. जाहिर है चिंता होना लाजिमी है उन नेताओं की जो पिछले साढे तीन साल से लगातार जी जान से पार्टी की सेवा में जुटे हैं. लेकिन उनकी चर्चाएं कैसे हों. शायद उन्हें ये पता नहीं.