जिन्दा आदमी का पोस्टमार्टम कर उठाया 10 लाख का क्लेम, डॉक्टर, वकील और पुलिस भी शामिल

The Fact India: आए दिन फर्जीवाड़े(Forgery) के मामले सामने आते रहते हैं पर इस बार एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है क्यूंकि एक जिन्दा व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर के 10 लाख रूपए का क्लेम उठाने का मामला सामने आया है. जाँच में सामने आया कि इस मामले में पुलिस से लेकर डॉक्टर और वकील भी शामिल हैं. दौसा पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है. मामले की जाँच में चौंकाने वाले खुलासे हुए है. इन आरोपियों ने हॉस्पिटल में फर्जी हार्ट और कैंसर के मरीजों की एक्सीडेंट में माैत बताकर क्लेम का दावा किया था. इससे पहले एक जिंदा व्यक्ति की सड़क हादसे में मौत बताकर उसके नाम का क्लेम उठा लिया.इस गैंग में करीब 22 से ज्यादा लोग शामिल थे. पुलिस ने एक डॉक्टर, पुलिस के एएसआई और एडवोकेट समेत 15 लोगों को पकड़ा है. यह भी सामने आया कि अभी इस मामले में 8 लोग फरार चल रहे हैं.

दरअसल, इसकी शुरुआत 2016 से हुई थी. तब इन लोगों ने हार्ट और कैंसर के मरीजों की एक्सीडेंट में मौत बताकर क्लेम का दावा किया था. इसके बाद 2017 में 26 जनवरी को यश चौहान ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी,  जिसमें गणेशपुरा रोड पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मनोज और अरुण नामक दो लोगों की अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत बताया गया था. फाइल में मौके पर पोस्टमार्टम करना लिखा गया था. इसी मामले में दौसा जिला अस्पताल के तत्कालीन ज्यूरिष्ट डॉ. सतीश खंडेलवाल ने फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की.

वहीं कोतवाली के अनुसंधान अधिकारी एएसआई रमेशचंद जाटव ने जांच कर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर एडवोकेट चतुर्भुज मीणा ने एक्सीडेंट क्लेम का दावा किया, जिसमें 10 लाख रुपए का क्लेम उठा लिया. असल में यह दोनों जिंदा थे. इसके बाद 2019 में एक साथ तीन केस सामने आने के बाद इसकी जांच की गई. सामने आया कि क्लेम उठाने के लिए यह लोग फर्जीवाड़ा(Forgery) कर रहे थे. एसपी ने बताया कि अभी तक पता चला है कि 10 लाख का ही क्लेम उठाया है, बाकि क्लेम के लिए दावा कर रखा था, लेकिन इससे पहले ही एक्शन हो गया.

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मामले का खुलासा

पुलिस अधिकारियों और एसओजी जयपुर की ओर से इन केस को रीओपन किया गया. पहले एसओजी और बाद में तत्कालीन जयपुर रेंज आईजी द्वारा जांच कराई गई. तब पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया. दर्ज FIR के अनुसार न तो कोई दुर्घटना हुई और न ही किसी की मौत. पूरे प्रकरण में आरोपियों ने साजिश रचकर झूठा मुकदमा दर्ज करवाया और फर्जी तरीके से इंश्योरेंस क्लेम लिया. इसके बाद यह जांच फिर से दौसा एसपी अनिल बेनीवाल को दी गई. जांच के लिए 28 अधिकारियों की टीम बनाई तो पता चला कि इन लोगों ने जिंदा आदमी तक का क्लेम उठा लिया.

गैंग का कनेक्शन

एडवोकेट चतुर्भुज मीणा, जानकारों के जरिए दौसा क्षेत्र में मरने वाले लोगों का ध्यान रखा जाता था. इसके बाद उनके परिजनों को पैसे का लालच देकर एक्सीडेंट की फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई जाती थी.

इन सभी एक्सीडेंट के मामलों की जांच एएसआई रमेशचंद ने ही की थी. मौके पर हादसे में मौत बताकर फर्जी पंचनामा तैयार करवाया जाता था.

डॉ. सतीश खंडेलवाल, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनवाकर बीमा कंपनी के सर्वेयर की मिलीभगत से एडवोकेट द्वारा क्लेम का दवा किया जाता था.