मंगलवार और चतुर्थी का योग आज, गणेश जी के साथ ही करें मंगल देव की भी पूजा

The Fact India: मंगलवार, 23 नवंबर को गणेश चतुर्थी व्रत (Ganesh Chaturthi Vrat) है. अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी मंगलवार को होने से इसे अंगारक गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है. इस तिथि पर घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए गणेश जी के लिए व्रत-उपवास करने की परंपरा है. मंगलवार को चतुर्थी होने से इस दिन गणेश जी के साथ ही मंगल ग्रह की भी विशेष पूजा करनी चाहिए.

जब यह चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है तो इसमें मंगल देव का आशीर्वाद भी जुड़ जाता है. अंगारकी संकष्टी चतुर्थी की मान्यता यही है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने वालों का मंगल ही मंगल होता है. ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड के अनुसार इस दिन मंगल दोष निवारण की पूजा का विशेष महत्व रहता है. यह शुभ संयोग है कि मंगलवार को चतुर्थी होने से इस दिन की गई गणेश पूजा से बीमारियां दूर होती हैं.

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गणेशजी के साथ मंगल देव की भी पूजा का विधान

इस अंगारक चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा के साथ मंगल देव की भी पूजा करने का विधान है. ग्रंथों के अनुसार मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है. अंगारक चतुर्थी व्रत में मंगल पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं. इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन, लाल फूल और गुलाल चढ़ाना चाहिए. इस चतुर्थी व्रत में लाल कपड़े पहनना चाहिए. इसके साथ ही फलों के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.

साल में एक या दो बार ही बनता है यह संयोग

हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में एक या 2 ही बार ये संयोग बनता है. इस साल सावन मास के कृष्णपक्ष की गजानन संकष्टी चतुर्थी यानी 27 जुलाई को यह संयोग बना था. इसके बाद 23 नवंबर को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर मंगलवार का संयोग बनेगा. इसके बाद अगले साल 19 अप्रैल को वैशाख महीने के कृष्णपक्ष की विकट संकष्टी चतुर्थी को मंगलवार होने से अंगारक चतुर्थी का संयोग बनेगा.