जानिए क्यों मनाते है मजदूर दिवस ?

Labour

The Fact India: इस कोरोना महामारी में सबसे ज्यादा अगर कोई दुखी है तो वो है मजदूर (Labour) जिन्हे एक जगह से दूसरे जगह पलायन करना पड़ रहा है।  मजदूरों का किसी भी देश के विकास एवं उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान होता है। मजदूरों के बिना किसी भी देश में औद्योगिक ढांचे के निर्माण की कल्पना करना संभव नहीं है। मजदूर सभी कामों की धुरी होने के साथ मानवीय श्रम का आदर्श उदाहरण भी होते हैं। मजदूर कड़कड़ाती सर्दी, भीषण गर्मी व मूसलाधार बरसात जैसे कठिन से कठिन हालातों में अपना पसीना बहाते हैं और अपना श्रम बेचकर न्यूनतम मजदूरी प्राप्त करते हैं। मजदूरों के हिस्से में कभी कोई इतवार नहीं आता। रोज कुआं खोदकर प्यास शांत करना ही उनका नित्य क्रम है। ये कहे कि मेहनत का नाम मजदूर है।

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कड़ी मेहनत करने वाले मजदूर कभी नींद की गोली नहीं लेते बल्कि हर ज़ोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष उनका नारा होता है। मजदूरों का यह संघर्ष हमें 1886 को अमेरिका में देखने को मिलता है। जहां के मजदूरों ने संगठित होकर काम की अधिकतम समय सीमा आठ घंटे तय करने की मांग की थी। अपनी यह मांग मनवाने के लिए उन्होंने हड़ताल का सहारा लिया और इसी हड़ताल के दौरान एक अज्ञात शख्स ने शिकागो के हेय मार्केट में बम फोड़ दिया। पुलिस ने गलतफहमी में मजदूरों पर गोलियां चला दी जिसके कारण सात मजदूरों की जान चली गई।

ऐसे हालातों में मजदूरों को बहुत ही बेकार जिंदगी जीने को विवश होना पड़ता है। उनके बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और पूरी तरह से बालिग होने से पहले ही अपने अभिभावकों के साथ मजदूरी के कामों में हाथ बटाने लग जाते हैं। यही से बाल मजदूरी की शुरुआत होती है। जो कि एक जघन्य अपराध के दायरे में आती है। भले ही देश में संविधान का अनुच्छेद-23 भारत के प्रत्येक नागरिक को शोषण और अन्याय के खिलाफ लड़ने का अधिकार देता हो व बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 कमजोर वर्गों के आर्थिक एवं वास्तविक शोषण को रोकने की वकालत करता हो लेकिन हकीकत यह है कि पर्याप्त जागरूकता के अभाव में देश में बंधुआ मजदूरी व मजदूरों के साथ शोषण का दौर अभी थमा नहीं है।

आज भी 1500 से 2000 रुपए के मासिक वेतन पर मजदूरों का शोषण किया जाता है। ये सही है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत होने के बाद नरेगा जैसी सरकारी योजनाओं का वेतन सीधे खाते में आने के कारण बिचौलियों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है लेकिन असंगठित क्षेत्र में अभी भी ऐसी पहल का इंतजार है।