Makar Sakranti: कहीं पोंगल तो कहीं लोहड़ी पर बनाई जाती है मकर सक्रांति, जानिए कब- कहां मनाते है ये पर्व

Makar Sakranti

The Fact india: यूं तो भारत पर्वों का देश मान जाता है लेकिन मकर सक्रांति (Makar Sakranti) की बात ही अलग है. मकर सक्रांति को हर राज्य में अलग अलग तरह से मनाया जाता है. बल्कि सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि इस पर्व को विदेशों में भी मनाया जाता हैं. तो चलिए जानते हैं देश के किस हिस्से में किस तरह मकर सक्रांति मनाई जाती है.

मकर सक्रांति को दान पर्व भी कहा जाता है. हर साल इसे 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है. इस दिन के बाद से शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. संक्रांति के दिन स्‍नान के बाद दान देने की परंपरा है. नदी या सरोवर के घाटों पर मेलों का भी आयोजन होता है. राजस्थान और गुजरात में इस दिन हर जगह आसमान पर रंग-बिरंगी पतंगें लहराती हुई नजर आती हैं.

14 या 15 जनवरी? जानें कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति?

वहीं अगर बात उत्तर भारत की कि जाए तो हरियाणा और पंजाब में मकर सक्रांति से एक दिन पूर्व लोहिड़ी मनाते हैं. इस दिन अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने मक्‍के की उसमें आहुति दी जाती है. साथ ही यह दिन  नई-नवेली दुल्‍हनों और नवजात बच्‍चे के लिए बेहद खास होता है. इस दिन लोग तिल से बानी मिठाइयां खाते हैं.

वहीं बंगाल में  गंगासागर के तट पर बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है. बंगाल में स्नान के बाद तिल दान की प्रथा है. मान्यता है कि इसी दिन यशोदा जी ने श्रीकृष्‍ण की प्राप्ति के लिए व्रत रखा था. और यही वह दिन था जब इसी दिन मां गंगा भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जा मिली थीं. इसी वजह से मकर सक्रांति के दिन गंगा सागर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

वहीं पूर्वी यूपी, बिहार और झारखण्ड में भी मकर सक्रांति के दिन उड़द की दाल, चावल, तिल, खटाई और ऊनी वस्‍त्र दान करने की (Makar Sakranti) परंपरा है. वहीं असम में इसे बिहू पर्व के रूप में मनाया जाता है. अगर दक्षिण भारत की बात की जाए तो तमिलनाडु में मकर सक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है. यहाँ यह पर्व चार दिनों तक चलता है. पहला दिन ‘ भोगी – पोंगल, दूसरा दिन सूर्य- पोंगल, तीसरा दिन ‘मट्टू- पोंगल’ और चौथा दिन ‘ कन्‍या- पोंगल’ के रूप में मनाया जाता है.