ममता बनर्जी ने बंगाल में साधा सियासी समीकरण, इन पर चला दांव

The Fact India: साल 2021 के सबसे बड़े सियासी संग्राम में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं… इसके साथ ही ममता ने भाजपा के दिग्गजों द्वारा फिट किये हुए समीकरणों का भी खेल बिगाड़ दिया है… यानि ममता बनर्जी ने अब बंगाल में खेल करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है… ममता बनर्जी ने साफ़ लफ्जों में कह दिया है कि हम खेलेंगे, लड़ेंगे और जीतेंगे….

दरअसल पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है… इनमें से 42 सीटों पर ममता बनर्जी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारने का फैसला लिया है… भले ही यह नंबर अपने आप में बड़ा लग रहा हो, लेकिन बीते विधानसभा चुनाव के मुकाबले काफी कम है… 2016 में टीएमसी ने 57 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे, जबकि 2011 में यह आंकड़ा 38 का था… इस तरह से देखें तो मुस्लिम उम्मीदवारों के मामले में 10 साल पुराने आंकड़े के करीब ही टीएमसी पहुंच गई है…. सियासी जानकारों की मानें तो बीजेपी के मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों की काट के लिए टीएमसी ने यह दांव चला है… इसके अलावा मुस्लिम वोटों के बंटवारे के डर के चलते भी ममता बनर्जी ने यह फैसला लिया है…

दरअसल सूबे में असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है… इसके अलावा इंडियन सेकुलर फ्रंट नाम से नई बनी पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी ने भी लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन के साथ लड़ने का फैसला लिया है… लिहाजा मुस्लिम वोटों के बंटवारे के असर से बचने के लिए ममता बनर्जी ने मुस्लिम की बजाय दलित वोटों पर फोकस करने का फैसला लिया है… मां, माटी और मानुष के नारे के साथ राजनीति करने वाली टीएमसी ने सीटों के बंटवारे में महिला, मुस्लिम और दलित के समीकरण का ख्याल रखा है…  ममता ने 50 महिलाओं को चुनावी समर में उतारने का फैसला लिया है… बंगाल की बेटी होने का दम भरने वाली ममता बनर्जी ने इसके जरिए यह संकेत देने की कोशिश की है कि एक महिला नेता होने के साथ ही वह महिलाओं के मुद्दों को लेकर भी सजग हैं..

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इसके अलावा ममता का MMD समीकरण पर ज्यादा जोर रहा…. ममता बनर्जी के टिकट बंटवारे पर नजर डालें तो साफ है कि उन्होंने मुस्लिम, महिला और दलित वोटों पर फोकस किया है… महिलाओं को 50 टिकट देकर उन्होंने आधी आबादी को टारगेट किया है… इसके अलावा दलित समुदाय के 79 उम्मीदवारों को उतारकर ममता ने संकेत देने की कोशिश है कि वह पिछड़े और दलित समुदाय के लिए प्रतिबद्ध हैं… इसके जरिए उन्हें बीजेपी की उस रणनीति की भी काट करने में मदद मिलेगी, जिसके जरिए वह दलित और पिछड़ों पर फोकस कर रही थी… इस तरह ममता बनर्जी ने महिला, मुस्लिम और दलित उम्मीदवारों के जरिए राज्य के तीन समीकरणों को साधने की कोशिश की है… ममता ने इस बार के चुनाव में अपने करीब 27 विधायकों के टिकट काट दिए हैं,,, जिसमें वो भी शामिल हैं जो पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. ऐसे में ममता ने टिकट के जरिए बंगाल के सियासी समीकरण साधने का दांव चला है… उनकी जगह पार्टी ने नए चेहरों को मौका दिया है…. कुलमिलाकर इस तरह ममता बनर्जी ने युवा मतदाताओं को संकेत दिया है तो दूसरी तरफ एंटी इन्कम्बैंसी को भी खत्म करने की कोशिश की है…