MP Byelection: परिणाम के बाद BJP-कांग्रेस संगठन में हो सकते हैं बड़े बदलाव!

The Fact India: मध्य प्रदेश में मार्च से अब तक हुए हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद उपचुनाव (MP Byelection) के लिए मतदान संपन्न हो गया है। नतीजे आने में महज कुछ घंटे बाकी है लेकिन उससे पहले बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां खुलकर उपुचनाव (MP Byelection) की जीत को अपने पक्ष में बता रही है। वहीं कुछ नेताओं ने एग्जिट पोल तक पर सवाल खड़े कर दिए है लेकिन अनुमानित नतीजों से साफ हो रहा है कि शिवराज सरकार बची रहेगी लेकिन चंबल-ग्वालियर क्षेत्र में बीजेपी की सीटें अपेक्षा से कम आने से ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव कम होगा।

उपुचाव को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि सुबे में शिव-ज्योति एक्सप्रेस दौड़ेगी लेकिन जैसे-जैसे प्रचार उफान पर आया। फीडबैक के आधार पर बीजेपी ने रणनीति मे बदलाव किया। प्रचार रथों और पोस्टर से सिंधिया को दूर रखा गया। इसके बाद ‘भाजपा है तो विश्वास है’ नारा गढ़ा गया लेकिन फाइनल हुआ किया गया शिवराज है तो विश्वास है।

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मतलब आगे भी बीजेपी का चेहरा सिर्फ शिवराज ही होंगे। दरअसल बीजेपी का टारगेट 20 से ज्यादा सीटें लाने का था लेकिन एग्जिट पोल में इतनी सीटें आती नहीं दिख रही है। ऐसे में संगठन स्तर पर आगे जो भी फैसले होंगे। उसमें उपचुनाव के नतीजों का बड़े पैमाने पर असर दिखेगा लिहाजा पार्टी में बड़े बदलाव के संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं।

दूसरी तरफ कांग्रेस सत्ता में आती नजर नहीं आ रही।जिसके चलते उपचुनाव की मतगणना के बाद कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अगर कांग्रेस की वापसी होती है तो संगठन को और मजबूती दी जाएगी लेकिन कांग्रेस विपक्ष में बैठती है तो कांग्रेस आलाकमान प्रदेश संगठन बदलाव कर सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को दो पदों पर तलवार लटक सकता है। क्योंकि कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष के पद पर रहते हैं तो उन पर नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी छोड़ने का दबाव बन सकता है।

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आपको बता दें कि दोनों दोनों ही दलों के लिए सीटों की संख्या का महत्व केवल प्रदेश की सरकार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि साल 2023 में होने वाले आमचुनाव की तैयारी और चेहरे, उपचुनाव (MP Byelection) के रिजल्ट को ध्यान पर रखकर तय होंगे। इसके अलावा उपचुनाव के नतीजों का सीधा असर निकाय चुनाव पर पड़ेगा।

दिसंबर-जनवरी में नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव होने हैं।उपचुनाव के परिणाम का इन दोनों चुनाव पर असर पड़ेगा। निकाय चुनाव के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने को लेकर दोनों ही दलों में मतभेद हैं। बीजेपी चाहती है कि महापौर का चुनाव उस शहर की जनता ही करे। कांग्रेस मानती है कि लोकतांत्रिक तरीके से महापौर चुना जाए यानी पार्षद चुनें।बहरहाल उपचुनाव के नतीजे आने में महज कुछ घंटे बाकी है…जिससे तय हो जाएगा कि शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने रहेंगे या कांग्रेस की वापसी होती है।

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