अब गहलोत गुट में भी दिखने लगी है कलह! नौबत देखने दिखाने तक पहुंची

The Fact India: कांग्रेस के अंदर अंतरकलह थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक के बाद एक नई परतें खुलती दिखाई दे रही है. अब तक पायलट कैम्प से ही खिटपिट की खबरे सामने आ रही थी लेकिन अब गहलोत कैम्प में भी टककराव उभर के सामने आने लगा है. पिछले दिनों पायलट कैम्प के विधायक इंद्राज गुर्जर ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए तारीफों के कसीदें पढ़े थे. जिसपर बवाल मच गया था. लेकिन अब हालात यह हो गए हैं कि मुख्यमंत्री गहलोत के सामने ही उनके दो करीबी आपस (Dotasra-Dhariwal) में भीड़ गए.

दरअसल कल गहलोत कैबिनेट की बैठक बुलाई गई थी. जिसमें फ्री वैक्सीन अभियान को लेकर चर्चा शुरू हुई तो पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और मंत्री शांति धारीवाल (Dotasra-Dhariwal) के बीच तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई.. और बात देख देने तक पहुंच गई.
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बैठक में कहा कि कांग्रेस ने आज फ्री वैक्सीनेशन की मांग करते हुए सोशल मीडिया कैंपेन चलाया. अब हर जिला स्तर पर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देना चाहिए. इस अभियान को ग्राउंड पर भी उतारने की जरूरत है. डोटासरा के इतना कहते ही मंत्री शांति धारीवाल ने डोटासरा की बात काटते हुए कहा कि इसकी क्या जरूरत है. मंत्रियों का काम ज्ञापन देने का नहीं है.

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बीच में टोकने पर डोटासरा ने आपत्ति जताई तो धारीवाल भी अड़ गए और कहा कि मैं अपनी बात रखूंगा.. इस पर दोनों में खूबी बहस हुई. बात तू-तू मैं-मैं तक पहुंच गई. राजस्व मंत्री हरीश चौधरी और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बीच-बचाव किया, लेकिन वे नहीं माने.
कैबिनेट की बैठक खत्म होने के बाद बाहर आकर धारीवाल और डोटासरा (Dotasra-Dhariwal) आपस में फिर भिड़ गए. इस बार तल्खी ज्यादा थी और आवाज भी ऊंची थी. मंत्रियों को खुलेआम लड़ता देख वहां मौजूद सीएम निवास के सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी भी चौंक गए. साथी मंत्रियों ने दोनों को अलग करवाया नहीं तो उनमें हाथापाई तक हो सकती थी. इस मामले में जगहंसाई होने के बाद आज गहलोत कैबिनेट के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास को सफाई पेश करनी पड़ी.. आप भी सुनिए आखिर किया कहा मंत्री खाचरियावास ने.

यूं तो लम्बे वक़्त से मंत्री और विधायकों के बीच खिटपिट की छोटी मोटी खबरें सामने आ रही थी. लेकिन कैबिनेट बैठक में इस तरह बवाल होना आम बात नहीं है. सियासी हलकों में चर्चाए हैं कि सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष से हटाने के बाद डोटासरा को पीसीसी चीफ बनाए जाने की बात अब भी कई विधायक और मंत्री पचा नहीं पाए हैं. जिसके चलते डोटासरा के आदेश भी नहीं मानते हैं. इसकी बांग पिछले दिनों कांग्रेस के सोशल मीडिया अभियान में भी दिखाई दी थी.. जिसमें कई विधायकों और मंत्रियों ने हिस्सा नहीं लिया था. खैर कुलमिलाकर कहा जा सकता है कि पिछले साल सियासी संकट के दौरान पार्टी में पड़ी दरार अब और गहरी होती दिखाई दे रही है.