UAPA कानून में संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

UAPA Law: सुप्रीम कोर्ट में यूएपीए एक्ट संशोधित अधिनियम ( UAPA Law ) को कई आधार पर चुनौती दी गई है। इसको चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र से शुक्रवार को जवाब मांगा है। याचिकाओं में कहा गया है कि ये संशोधन नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और एजेंसियों को लोगों को आतंकवादी घोषित करने की ताकत प्रदान करते हैं।

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मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने सजल अवस्थी और गैर सरकारी संगठन ‘असोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए।

बता दें कि अवैध गतिविधियां रोकथाम कानून में हाल ही में हुए संशोधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। कानून में जो बदलाव किए गए हैं, उनके बदलावों को ही याचिका में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि यह कानून संविधान के अनुच्छे 14, 19 और 21 के खिलाफ है।

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संसद से पास किए गए इस कानून (UAPA Law) के अनुसार केन्द्र सरकार किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी की श्रेणी में डाली सकती है। फिर वह चाहे किसी समूह के साथ जुड़ा हो या नहीं।

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