फोन टैपिंग प्रकरण पर केंद्रीय मंत्री की सफाई, कहा- बदनाम करने की हो रही साजिश

The Fact India : पेगासस जासूसी के कथित दावे को लेकर आज संसद के मानसून सत्र में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwani Vaishnaw) ने सरकार का पक्ष रहा. उन्होंने कहा है कि हमारे कानूनों और मजबूत संस्थानों में जांच और संतुलन के साथ किसी भी प्रकार की अवैध निगरानी संभव नहीं है. भारत में एक अच्छी तरह से स्थापित प्रक्रिया है जिसके माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक संचार का वैध तरीके से इस्तेमाल किया जाता है. आईटी मंत्री ने कहा कि जब हम इस मुद्दे को तर्क के चश्मे से देखते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि इस सनसनीखेज के पीछे कोई दम नहीं.

300 से ज्यादा नंबरों की फोन टैपिंग

आपको बता दें रविवार को कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर से भारत में कथित तौर पर 300 से ज्यादा प्रमाणित फोन नंबर हैक किए गए. इनमें दो मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों, तीन विपक्षी नेताओं, 40 से ज्यादा पत्रकारों, एक न्यायाधीश और सुरक्षा एजेंसियों के पूर्व तथा वर्तमान प्रमुखों के अलावा कई उद्योगपतियों व कार्यकर्ताओं के फोन नंबर शामिल हैं.

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बदनाम करने की हो रही कोशिश

आईटी मंत्री वैष्णव (Ashwani Vaishnaw) ने कहा कि पहले भी पेगासस के इस्तेमाल को लेकर इसी तरह के दावे किए गए थे. उन रिपोर्टों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और सुप्रीम कोर्ट सहित सभी पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार किया गया था. 18 जुलाई 2021 की प्रेस रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी स्थापित संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश लगती है.

सरकार पहले भी कर चुकी है खारिज

हालांकि भारत सरकार ने जांच को खारिज करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश करार दिया था. सरकार ने 2019 में हुए उस विवाद का भी जिक्र किया है, जिसके तहत व्हॉट्सएप में मौजूद एक खामी का इस्तेमाल 20 हस्तियों के फोन में मालवेयर डालने के लिए किए जाने का दावा किया गया था. इस दावे को बाद में सभी पक्षों ने खारिज किया था.