पायलट और भाजपा की राह में आई ये रूकावट

द फैक्ट इंडिया ब्यूरो। कहते हैं कि ‘ये सियासत के पेच ओ खम, कभी तुम बदले कभी हम।’ कुछ ऐसा ही हुआ बीते रोज राजस्थान की सियासत में, जिससे कुछ लोगों के सपनें टूटते नजर आ रहे हैं। देर रात राजस्थान विधानसभा के 6 सदस्यों ने, जो कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक थे, विधानसभा अध्यक्ष को अपना विलय पत्र सौंपकर कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली। अंदरखाने की बात करें तो इस पूरे घटनाक्रम से सचिन पायलट और भारतीय जनता पार्टी का सपना टूटा है।

सीएम गहलोत ने तोड़ा मोदी-शाह का सपना, बसपा के 6 विधायक कांग्रेस में शामिल

बता दें कि प्रदेश में सियासत के पावर सेंटर बने अशोक गहलोत को कमजोर करने की हर मुमकिन कोशिश में जुटे उनके विरोधियों को बीती रात करारा जवाब उस वक्त मिला, जब बसपा (BSP) के सभी 6 विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अनुपस्थिति में गहलोत के काम करने के तरीकों की तारीफ कर कांग्रेस में शामिल होना स्वीकार किया। हालांकि प्रदेश सरकार के मुखिया गहलोत ने उन्हें देर रात बुलाकर इस पर गुप्त मंत्रणा की थी। जिसके बाद बसपा (BSP) के सभी विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मिलकर कांग्रेस में शामिल होने का विलय पत्र सौंपा। वहीं अब दबे स्वर में कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार में मंत्री के रूप में कार्य कर आरएलडी विधायक सुभाष गर्ग भी पार्टी सदस्यता स्वीकार कर सकते हैं।

पिछले कुछ दिनों से लगातार भाजपा प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिराने की बात करती रही है, मगर हालिया घटनाक्रमों को देखकर ऐसा तो बिल्कुल नहीं लगता कि कांग्रेस को सत्ता छिन जाना का रत्ती मात्र भी भय सता रहा हो। वहीं बसपा (BSP) के विधायकों का कांग्रेस पार्टी में शामिल होने पर कांग्रेस का विधानसभा में बाहुबल 100 से बढ़कर 106 हो गया है यानि पूर्ण बहुमत की सरकार। अब भाजपा को प्रदेश में सरकार को अस्थिर करने का स्वप्न मात्र एक स्वप्न ही बनकर रहता दिखाई दे रहा है।

वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट जो लगातार सीएम बनने की ईच्छा पाले हुए हैं। बसपा (BSP) विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने से पायलट के मुख्यमंत्री बनने में कहीं न कहीं एक बार बड़ी रूकावट का काम करेगी। हालांकि पायलट का अशोक गहलोत के रहते हुए सीएम बनना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन ही साबित होता है।

बहरहाल, इन सभी घटनाक्रमों के बाद न केवल भाजपा और सचिन पायलट के सपने टूटते दिख रहें हैं बल्कि बसपा (BSP) खुद राजस्थान में खत्म होती नजर आ रही है। बता दें कि बसपा (BSP) के प्रदेश अध्यक्ष सीताराम मेघवाल और प्रदेश प्रभारी धर्मवीर अशोक को तो इस पूरे मामले की जानकारी ही न होने का हवाला देते हुए कहा कि अगर उन्हें ऐसा होने का पूर्वाभास हो जाता तो वे इस विलय को होने से पहले ही रोक सकते थे। खैर! इस विलय के साथ ही तीन—तीन सपनों का टूटना तो हुआ ही है, वहीं प्रदेश सरकार के मुखिया अशोक गहलोत एक बार फिर प्रदेश में राजनीति के जादूगर साबित हुए हैं।

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