Durgaashtami:नवरात्री की अष्टमी माँ महागौरी को समर्पित, जानिए कैसे पड़ा गौरी नाम

The Fact India: मां दुर्गा को समर्पित त्योहार शारदीय नवरात्री का आज आठवां दिन है, जो माँ महागौरी(Mahagauri) को समर्पित है. माता का रंग अत्यंत गोरा होने की वजह से उन्हें महागौरी के नाम से पुकारा जाता हैं. शास्त्रों के अनुसार, मां महागौरी ने कठिन तप कर गौर वर्ण प्राप्त किया था. माना जाता है कि मां महागौरी भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं और उनके बिगड़े कामों को पूरा करती हैं. मां गौरी दांपत्य प्रेम की देवी हैं. माता महागौरी की पूजा करते समय पीले या सफेद वस्त्र भी धारण कर सकते हैं. महागौरी का पूजन करते समय पीले फूल अर्पित करने चाहिए.

जो लोग पूरी नवरात्रि व्रत रखते है और वो भी जो व्रत नहीं रख पाते,  सभी अष्टमी के दिन व्रत रखकर माता महागौरी का पूजन करते हैं.

माँ महागौरी की पूजा का महत्व

पौराणिक कथा के अनुसार,  मां महागौरी(Mahagauri) मां पार्वती का ही रूप हैं. कहा जाता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने हजारों सालों तक कठोर तपस्या की थी. इस तपस्या से उनके शरीर का रंग काला हो गया था. इस दौरान जब भगवान शिव मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए तब उन्होंने उन्हें गंगाजल छिड़क कर गोरा कर दिया. इस कारण उन्हें महागौरी भी कहा जाता है. मान्यता है कि महाष्टमी के दिन व्रत करने और मां म​हागौरी की आराधना करने से व्यक्ति को सुख,  सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. सब पाप नष्ट हो जाते हैं.

नवरात्री का सातवां दिन माँ कालरात्रि को समर्पित, जानिए कालरात्रि की पूजा का महत्व

मंत्र

1. श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:।

महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददो।।

2. या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

3. ओम महागौरिये: नम:।