Maharashtra Political Drama: शिंदे साबित होंगे? पायलट या सिंधिया

The Fact India: महाराष्ट्र (Maharashtra Political Drama) की महाभारत के सियासी चौसर पर पासा एक बार फिर पलट गया हैं. सत्ता के सिंघासन की डोर महाविकास अघाड़ी के हाथ से ढीली पड़ती दिखाई दे रही है. विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे ने 3 दर्जन से ज्यादा नेताओं के साथ बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है. लिहाजा ऐसे में सियासी गलियारों मने  सवाल पूछे जाने लगा है कि आखिर बगावत कि राह अख्तियार करने वाले एकनाथ शिंदे सचिन पायलट साबित होंगे या ज्योतिरादित्य सिंधिया.

दरअसल पिछले दो सालों में हिन्दुस्तान की जनता दो बड़ी बगावत देख चुकी है. एक मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंह. जिन्होंने अपनी सरकार गिरा कर ही दम लिया था.. और दूसरे राजस्थान के सचिन पायलट. जो बगावत कर भीहड़ में जाने के बाद फिर लौट आए. और सरकार बच गई. दरअसल येन केन प्रकारेण सारी सियासत कुर्सी को लेकर ही है.

साल 2020 में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच सियासी अदावत इतनी बढ़ गई कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए पायलट को बगावत करनी पड़ी गई. 34 दिन सरकार बाड़े में बंद रही. भाजपा लगातार अंदरखाने कोशिश करती रही कि इसका फायदा उठाया जाए. भाजपा ने प्रयास भी किए. लेकिन सत्ता तक पहुंचने के लिए सीटों का अंतर इतना बड़ा था कि भाजपा उससे पार नहीं पा सकी. लिहाजा ऐसे में राजस्थान में सत्ता कांग्रेस के पास ही रही… सचिन पायलट ने भी कांग्रेस का हाथ नहीं झटका. लेकिन बीजेपी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. गाहे बगाहे भाजपा को अब भी उम्मीद है कि उसका ऑपरेशन लोटस सफल होगा.

हालाँकि इससे पहले भाजपा मध्यप्रदेश में अपने मिशन में सफल रही थी. मध्य प्रदेश में 2018 कांग्रेस की सत्ता स्थापित होने के साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया का तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के खिलाफ असंतोष का लावा अंदर ही अंदर सुलग रहा था. वह कमलनाथ के मुख्यमंत्री और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष का पद दोनों रखने से नाराज़ थे. जबकि राज्य में कांग्रेस की जीत में सिंधिया की भी अहम भूमिका थी. वह मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार भी माने जा रहे थे. लेकिन कुर्सी मिली कमलनाथ को. उसके बाद कमलनाथ का सिंधिया को लगातार नीचा दिखाना, नई सरकार का वादों को पूरा न करना जैसे आरोपों ने सिंधिया का मोहभंग कर दिया. सिंधिया परिवार से पुराने संबंधों की बदौलत भाजपा ने इसे हवा दी, सिंधिया फिर से भगवा पार्टी में आ गए और कमलनाथ सरकार धराशायी हो गयी.

अब कुछ ऐसी ही तस्वीर महाराष्ट्र (Maharashtra Political Drama) से सामने आती नजर आ रही है. गठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा बुलंद करने वाले एकनाथ शिंदे के अंदर भी काफी समय से नाराजगी का गुबार उठ रहा था. उनकी कई अधूरी आकांक्षाएं भी हैं. उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा था. इसके अलावा शिंदे की नाराजगी शिवसेना के कांग्रेस-एनसीपी से गठबंधन करने को लेकर भी थी. लिहाजा मौका देखते ही शिंदे भी पायलट और सिंधिया के राह पर निकल गए. लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि शिंदे सरकार गिरा कर सिंधिया साबित होते हैं. या पायलट की राह पर चल कर वापसी करते हैं और अपनी सरकार को बचा लेते हैं.

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