पुष्कर के ज्योतिषविद से जानिए इस साल मकर सक्रांति क्यों है खास

The Fact India: मकर सक्रांति (Makar Sakranti) का भारत में खास महत्तव है. 14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह त्योहार दान पुण्य के लिए भी खास महत्तव रखता है. राजस्थान के पुष्कर में प्रसिद्ध ज्योतिषविद बताते हैं कि भारतवर्ष में मकर सक्रांति पर्व का आगमन 14 जनवरी सन 2022 को पौष शुक्ला द्वादशी के दिन दोपहर 2 बजकर 28 मिनिट रोहिणी नक्षत्र में मकर सक्रांति का प्रवेश होगा. ज्योतिषमत और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व रहेगा. साथ ही वर्षों बाद मकर सक्रांति पर विशेष योग बन रहा है. इस वर्ष वृषभ लग्न में सक्रांति के प्रवेश के साथ जब राहु पहले और केतु सप्तम भाव में होता है और बाकी सभी ग्रह अलग होते हैं तब पूर्ण कालसर्प योग बनता है. जो रोग, रिपु,ऋण के निवारण मैं विशेष प्रभाव रखता है.

पूर्ण कालसर्प योग के चलते महिलाओं के रोग, संक्रामक रोग का प्रभाव अधिक रहेगा. जो अप्रैल माह तक प्रभावी रहेगा. कुंभ राशि से बृहस्पति का ग्रह जब मीन राशि में प्रवेश करेगा तब सितंबर माह तक संक्रामक रोगो की समाप्ति होगी. पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि मकर संक्रांति पुराणों के अनुसार देवताओं का पहला दिन होता है साथ ही इसी दिन भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागे थे. इसके चलते भगवान सूर्य, यम, ओर धर्मराज की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन तिल और तेल से बनी वस्तुओं का दान करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है. इस दिन धर्मराज जी का पूजन उद्यापन हवन पूजन दान पुण्य का विशेष महत्व रहता है. वर्ष में एक बार इस विशेष पूजा से मनुष्य कर्म बंधन से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्ति को अग्रसर होता है.

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सुहागन स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना के लिए 13 वस्तुओं का दान करके भगवान सूर्य का पूजन करती है ।तीर्थ नगरी पुष्कर में सरोवर किनारे मकर सक्रांति के अवसर पर तर्पण, श्राद्ध, उपनयन संस्कार, दान पुण्य, पूजा अर्चना, का कोटि गुना फल प्राप्त होता है. शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन गंगा सागर, वाराणसी, त्रिवेणी संगम, हरिद्वार, पुष्कर, उज्जैन की शिप्रा, लोहाग्रल आदि तीर्थ स्थलों पर स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिलती है. गौरतलब है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था. इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे−पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं. साथ ही महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए इस दिन तर्पण किया था. इन्हीं मान्यताओं के अनुसार हजारों लोग आस्था का दामन थाम मकर सक्रांति के अवसर पर तीर्थ नगरी पुष्कर पहुंचेंगे.

रिपोर्ट- राकेश शर्मा