टोंक में पायलट ने कृषि कानूनों को किसानों के लिए बताया घातक

The Fact India: टोंक दौरे के दूसरे दिन (Pilot Tonk) पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सरकार जब समर्थन मूल्य देना बंद कर देगी तब दो चार उद्योगपति फसल का दाम तय करेंगे. किसान को मजबूरन उस दाम पर अपनी फसल बेचना पड़ेगा. राजस्थान और देश भर में आज जिस तरह का माहौल हर जगह आज किसान धरने दे रहे है. पांच – छह हफ्ते हो गए है और उस मुद्दे को लेकर आज पुरे देश में चर्चा हो रही है.

पायलट ने कहा कि मुद्दा बड़ा स्पष्ट है , सरल है. मुद्दा यह है कि इस देश में जो किसान है उनको जो छूट दी गयी थी. उनको जो सरकार ने मदद और समर्थन का वादा पिछले सत्तर साल से दे रही थी उसको बदल कर अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों को, बड़े बड़े उद्योगपतियों को छूट दी गयी है कि वो मंडियों के बाहर अनाज ले सकते है. समर्थन मूल्य का कोई जिक्र नहीं है और जो देश में मंडी सिस्टम कायम थी, केंद्र सरकार उसको खत्म करने का लगभग मन बना चुकी है.

उन्होंने कहा कि किसानो में ऐसा पहली बार हुआ है जब 24 अलग अलग विपक्षी दल एकजुट होकर यह मांग रख रहे है कि सरकार ने जो तीन कानून बनाये है. उन कानूनों को वापस ले क्योंकि किसी भी कानून को बनाने से पहले ना तो किसान से चर्चा करे है, ना किसी राज्य सरकार से चर्चा करी है और जबरदस्ती, जल्दबाजी में संसद से उन विधयकों को पारित कर कर उसको लागू कर दिया. लगभग 50 से ज्यादा किसानो ने आत्महत्या कर ली है , उनकी जाने चली गयी है.

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केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए (Pilot Tonk) कहा कि ठण्ड के मौसम में किसान लगातार बैठे है और मैं केंद्र सरकार से पूछना चाहता हूँ कि अगर यह कानून किसानो के हित में होते तो आज किसान धरना क्यों दे रहे है ? अगर यह कानून किसान के हित में होते तो सरकार के सहयोगी दल, अकाली दल के नेता इस्तीफा क्यों दिया? सरकार से समर्थन वापस क्यों लिया ? एनडीए का घटक दल हनुमान बेनीवाल जी पार्टी ने समर्थन वापस क्यों लिया ? सरकार के अपने मंत्री इस्तीफा दे रहे है.

उन्होंने कहा कि एनडीए का घटक दल उनका साथ छोड़ रहे है. पूरे हिंदुस्तान में और विश्वभर में इसकी आलोचना हो रही है तो हमारा और कांग्रेस पार्टी का निवेदन बस इतना है कि कृपा करके इन तीनो कानूनों को वापस ले ले. किसान से चर्चा करे और जो समर्थन मूल्य 1947 से लेकर आजतक सरकार देती है. उस समर्थन मूल्य को लिखित में दे.

उन्होंने (Pilot Tonk) कहा कि सबसे पहले इस कानून को वापस लेना चाहिए. आप कल्पना करो साथियों इस देश की दो तिहाई जनता कृषि पर निर्भर है. और सिर्फ खेती करने वाले किसान की बात नहीं कर रहा हूँ. मजदुर है, बोरी वाला है, तोलने वाला है, मंडी में काम करने वाले लोग, दुकान पे काम करने वाले लोग है. पूरे परिवार इससे प्रभावित होते है. बजाये इसके कि मंडियों को और बनाये , हम तो यह कहते है कि हर 6 – 10 किलोमीटर पर मंडी होना चाहिए ताकि किसान अपना अनाज बेच सके. इनका तर्क है , जो चार बोरी अनाज पैदा करेगा, वह चार बोरी लेकर बम्बई जायेगा, कलकत्ता जायेगा या चंडीगढ़ जायेगा. और वहां खरीदने वाले ने अगर खरीद के पैसे नहीं दिए तो आपको फिर एसडीएम के पास आना पड़ेगा और कलक्टर के पास जाना पड़ेगा.