मकर संक्रांति पर कोरोना का असर, तीर्थ नगरी पुष्कर में श्रद्धालुओं की दिखी कमी

The Fact India: देशभर में आज मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है. बात करें तीर्थ नगरी पुष्कर (Pushkar Sankranti) कि तो मकर संक्रांति के अवसर पर जो भव्य धार्मिक माहौल पहले देखने को मिलता था, उसमें कोरोना संक्रमण की वजह से कमी आई है. पुष्कर में संक्रांति के पर्व पर देशभर से श्रद्धालु सरोवर में आस्था की डुबकी लगाने आते थे. लेकिन इस बार पुष्कर का पवित्र सरोवर कुछ सूना नजर आया.

शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण में आ जाता है. इसके साथ ही एक महीने से चल रहे मल मास का समापन और शुभ कार्य की शुरुआत भी होती है. साथ ही सूर्य उत्तरायण होने पर धार्मिक स्थलों पर जमकर दान पूण्य भी होता है. तीर्थ नगरी पुष्कर में भी मकर संक्रांति के अवसर पर शुक्रवार को लोगों ने पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाकर गरीबों और गायों को दानपुण्य किया. साथ ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में पूजा-अर्चना कर मंदिरों के दर्शन भी किये. गायों को चारा खिलाकर धर्म लाभ प्राप्त किया.

मकर संक्रांति के दिन तिल की वस्तुओं का दान

मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन तिल, तेल गुड़ , शक्कर सहित अन्य खाने और पहनने की वस्तुओं को दान करने का बहुत महत्व है. इन्हीं मान्यताओं के चलते पुष्कर में भी लोगों ने तिल के लड्डू , तिलपट्टी  सहित अन्य वस्तुओं का दान किया. व्यापारियों की और से भी जगह – जगह स्टॉल्स लगाकर पौष बड़े के रूप में लोगों को प्रसाद वितरित किया गया.

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गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के पश्चात तीर्थ नगरी पुष्कर में श्रद्धालुओं की आवक कम हो गई थी. अमूमन ऐसा ही नजारा मकर सक्रांति के अवसर पर भी तीर्थ नगरी पुष्कर में देखने को मिला जहां पुष्कर सरोवर के घाट, और मुख्य बाजारों में श्रद्धालुओं की संख्या बीते सालों की तुलना में कम ही नज़र आई है.

पुष्कर से राकेश शर्मा की रिपोर्ट