Gender Change : माँ-बाप को बेटे के लिए रोता देख बड़ी बेटी ने करवाया जेंडर चेंज

The Fact India : लोगों की सोच बदलने में लगता है कि अभी भी काफी समय बाकि है, लकड़ा लड़की में भेदभाव करने वाले लोगों की मात्रा आज के समय में भी काफी है, हालांकि सोच बदल रही है लेकिन समय को देख के अगर सोचा जाये तो जिस गति से सोच और विचार बदलने चाहिए वो नहीं हो रहा है। आज के समय में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिसे लड़की होने पर निराशा और लड़का होने पर ख़ुशी होते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि अगर लड़का हुआ तो वो वंश को आगे लेकर जायेगा और लड़की हुई तो उसको पढ़ाना लिखाना पड़ेगा फिर उसकी शादी करनी पड़ेगी इतना सब खर्चा कर के भी उसे पराये घर ही जाना है, बस ऐसी सोच ने लड़का और लड़की के बीच अंतर की एक बड़ी दिवार बना रखी है। आइये आपको एक किस्सा बताते हैं उत्तर प्रदेश के मेरठ का जहां एक परिवार में 5 बहने थी और उनका कोई भाई नहीं था। 20 साल की निर्मला, 5 बहनों में सबसे बड़ी है। उसके माता-पिता की ख्वाहिश थी कि उनके घर एक बेटा हो, जो उनका वंश आगे बढ़ा सके। बेटा न होने के गम में कई बार उनकी आंखें भी भर आती थीं। आखिरकार निर्मला ने उनका ये गम दूर करने का फैसला लिया और अपनी पहचान (Gender Change) बदलवा ली।

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मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल मेडिकल हॉस्पिटल में निर्मला ने जेंडर चेंज कराकर खुद को लड़के में बदल लिया है। वह कहती है,’बहनों में सबसे बड़ी होने के नाते मेरा फ़र्ज़ है कि मैं घर की हर जिम्मेदारी निभाऊं। इसलिए मुझे अपनी पहचान बदलनी (Gender Change) पड़ी है। मैं नहीं चाहती थी कि हमारा हंसता-खेलता परिवार बिखरे या टूटे। तब मुझे लड़की का जिस्म छोड़कर लड़का बनना पड़ा। बेशक मैं एक लड़की पैदा हुई थी, लेकिन अब मुझे तन और मन की लड़की को मारकर एक लड़के की तरह जीना है। मैं इसमें खुश हूं क्योंकि आज मेरे मां-बाप को बेटा और बहनों को भाई मिल चुका है’। निर्मला के घर कोई लड़का न होने के वजह से उसको ये कदम उठाना पड़ा। शायद ये उसकी मर्ज़ी नहीं मज़बूरी रही होगी। अपनी बहनों को भाई दिलाने के लिए और अपने माता पिता को एक बेटा दिलाने के लिए उसको आखिरखार ये कदम उठाना पड़ा उसने अपनी मज़बूरी को ही अपनी मर्ज़ी में बना लिया। …. समाज में अगर लड़का और लड़की का महत्व सामान हो जाये तो शायद ऐसा करने की किसी को ज़रूरत ही न पड़े। हमारे देश में लड़का होने की चाहत बढ़ते ही जा रही है जिस से कई जुर्म भी आए दिन सामने आते ही रहते है, कई लोग पैदा हुई बच्ची को झाड़ियों में फेंक देते हैं तो कई लोग मार डालते है। हम सब को उस वक़्त का इंतज़ार बेसब्री से रहेगा जब लड़का और लड़की के बीच भेद भाव खत्म हो जायेगा जब लड़की तो भी उतना ही महत्व मिलेगा जितना लड़के को मिलता है और किसी के दबाव में आकर लड़कियों को निर्मला जैसा कदम न उठाना पड़े। …

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