कटऑफ के आधार पर नहीं मिलेगी REET लेवल-1 कैंडिडेट्स को नियुक्ति!

The Fact India: रीट परीक्षा को लेकर हुए घमासान से हम सभी वाकिफ है…लगातार धरने प्रदर्शन… सीबीआई जांच की मांग और भी कई… लेकिन इन सभी के बीच सरकार ने  रीट लेवल वन में चयनित कैंडिडेट्स को टीचर पद पर नियुक्ति देने के लिए कट ऑफ जारी कर दी है… जनरल के 130, ओबीसी के 127 एससी के 119 और एसटी का 110 कटऑफ (REET LEVEL 1) रहा… लेकिन अगर कटऑफ में आपका नंबर आता है… तो भी ये टीचर पद पर नियुक्ति का आधार नहीं है… नियुक्ति पाने वाले कैंडिडेट के मार्क्स से भी काफी ज्यादा होगे… एक्सपर्ट का मानना है कि जनरल कैटेगरी में 135 या उससे अधिक अंक वालों की नियुक्ति तय मानी जा रही है… हालांकि शिक्षा विभाग ने 130 कटऑफ माना है… दरअसल 135 कटऑफ इसलिए क्यूंकि कैंडिडेट्स की संख्या दोगुनी है… जिससे 130 से 134 अंक पर सबसे ज्यादा कैंडिडेट्स होंगे… इन्हें नियुक्ति का अवसर नहीं मिलेगा.. सामान्य पदों पर पहली नियुक्ति मेरिट में सबसे ज्यादा अंक लाने कैंडिडेट को मिलेगी… इसी तरह आगे के पद भरे जाएंगे… ऐसे में ये तय नहीं है… कि नियुक्ति पाने वाले का कटऑफ मार्क्स क्या होगा.

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अब सवाल ये कि आगे क्या प्रोसेस होगा… शिक्षा विभाग ने जिलावार सूची तैयार कर ली है… ऐसे में सभी कैंडिडेट्स को अपने वो डॉक्यूमेंट चेक करवाने होंगे जो उन्होंने ऑनलाइन में बताए थे…अगर किसी डॉक्यूमेंट में अब कमी रही तो कैंडिडेट नियुक्ति से वंचित हो जाएगा… ये सूची बनने पर वापस शिक्षा निदेशालय आएगी… यहां से इस लिस्ट को पूरे स्टेट के आधार पर तैयार किया जाएगा… फिर सभी जिलों को मेरिट के आधार पर चयनित कैंडिडेट्स के नाम भेजे जाएंगे… जिले में जिस कैंडिडेट के मार्क्स ज्यादा है… उसे प्राथमिकता से पोस्टिंग दी जाएगी.. सभी चयनित उम्मीदवारों की पहली नियुक्ति रूरल एरिया में होगी… बड़ी संख्या में जिले से बाहर भी नियुक्ति मिल सकती… शिक्षा निदेशालय ने डॉक्यूमेंट वैरिफिकेशन के लिए हर जिले में पांच टीम बनाने के निर्देश दिए है… ताकि जल्द ही वैरिफिकेशन हो सके.

वैसे आपको बता दे… राजस्थान के कैंडिडेट्स को अपने जिले में ही डॉक्यूमेंट दिखाने होंगे, जबकि राज्य से बाहर के कैंडिडेट्स को बीकानेर आकर अपने डॉक्यूमेंट दिखाने होंगे… अन्य स्टेट के डॉक्यूमेंट का वैरिफिकेशन संबंधित यूनिवर्सिटी से भी किया जा सकता है… कई बार टीम बनाकर यूनिवर्सिटी में बीकानेर से ही कर्मचारी भेजे जाते हैं, ताकि ये स्पष्ट हो जाए कि डिग्री फर्जी तो नहीं है.. दरअसल पहले हुई नियुक्तियों में शिक्षा विभाग पदों के आधार पर ही डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन करवाता था… ऐसे में अयोग्य पाए गए कैंडिडेट्स की जगह दूसरे कैंडिडेट्स को बुलाने में समय लगता था.. ऐसे में अब एक साथ ही डॉक्यूमेंट वैरिफाई करके कमी वाले अलग कर दिए जाएंगे और इसके बाद बचे उम्मीदवारों को उपलब्ध पदों पर नियुक्ति दी जाएगी… तो इस तरीके से अब नियुक्तियों का पूरा प्रोसेस होगा… और 31 मार्च से पहले उम्मीद की जा रही है कि नियुक्तियां दे दी जाएगी…

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